shayari by dhingra sushil

लम्हों से जिंदगी गर गुजर जाती

चंद बूंदों से गर प्यास बुझ जाती।

क्यों जाता कोई किसी महफिल में

जिंदगी अपने घर में ना गुजर जाती।।

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