shayari by mithilesh rai ‘ mahadev ‘

दीपावली

खुशी की जैसी शाँम आई है जिन्दगी में!
रगों में फिर से जागा है जाँम जिन्दगी में!
छुप रहे हैं #अंधेरे सब उजालों के तले,
सुबह सी कोई शाँम जागी है जिन्दगी में!

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