#Shayari by Ishq Sharma

इश्क़-ऐ-चाँद ●●●●•°

शरद पूर्णिमा स्पेशल

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धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी,

तारे शरमा  गये  देख  के चाँदनी।

बादलो में चमकती देखा चहुँओर,

रूह  में  चाँद के है बसी चाँदनी।।

 

धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी,

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चाँद तरसे कभी ना कभी चाँदनी,

है मोहबत इनकी अमर कहानी।।

ये हरयुग में देखा सभी ने कभी।।

दुलहा चाँद तो है दुल्हन चाँदनी।।

 

धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी,

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गर ठोस चाँद है तो कोमल चाँदनी,

गर ओस चाँद है तो सुमन चाँदनी,

गर जवां चाँद तो है हसीन चाँदनी,

चाँद है गर अज़ब तो गज़ब चाँदनी।

 

धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी,

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तारो की तरह ये टिमटिमाती नही,

हँसती गाती नही  मुस्कुराती नही,

तारो की बारात लेआता जब चाँद,

सुरलयताल की तरह आती चाँदनी।

 

धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी,

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इश्क़शर्माप्यारसे-मगसम4049

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