#Shayari by Ishq Sharma

कुछ तो है यहाँ,

जिसके होने का हमें गुमान होता है

वही, जहाँ की धरती, माँ

और पिता आसमान होता है

अरे! तू जानता ही क्या है मूरख

इस मुल्क़ के बारे में

ये वही मुल्क़ है जहाँ,

हर मज़हब का पलड़ा एकसमान होता है

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ना मंदिर की घण्टी बोलती है, ना मस्जिद का अज़ान बोलता है
उस परवरदिगार के घर में तो, सिर्फ़ इंसान का ईमान बोलता है

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