#Shayari by Ishq Sharma

1 मेरे ख़्वाब मीठे आये मुझे स्वाद भरा खिलाती है

खुद लूखी-सूखी खाकर #माँ चुपके सो जाती है

 

2 कलम से मुझे अपनी ये कलाम लिखना है

दफ़ा लाख दुआ में #माँ तेरा नाम लिखना है

 

3 तकलीफ़े सारी दूर हो गई तेरी आहट से माँ

नींद भी अरसों बाद आई तेरी गोद की गर्माहट से माँ

 

4 सब किताबें फाड़ दी इश्क़ के चाहतों की,

रहने दिया लफ्ज़ #माँ तब नींद आई राहतों की

 

5 तेरा फ़र्ज़ ऐसा क़र्ज़ है मैं अदा कर नही सकता

#माँ किसी और की ख़ातिर तुझे ज़ुदा कर नही सकता

 

6 वो हुक्म देता है तो इंतज़ार भी करता है,

मुझ इश्क़ से कोई इतना प्यार भी करता है

 

7 सज़दे में झुकना आदत हो गई है,

इंसां को ख़ुदा तू लूला न समझ…

 

8 तेरी क़ायनात में मुझे एकबात सच्ची लगी,

मूरत ऐ वफा है #माँ ये बात अच्छी लगी

 

9 कितनी वाकिफ़ है मेरी तकलीफों से

जल्दी सो जाऊ तो ख़्वाबो में दुआ करती नज़र आती है #माँ

 

10 उसके माथे में लगे हर कलंक मिट जाते है

मस्तक में जो धूल #माँ के चरण की लगाते है

 

11 तौलिया लाने में वक़्त लगेगा, ये कहकर लड़खड़ाती #माँ ने आँचल से मेरे बालों को पोंछ दिया

 

12 सिवा न तेरेे किसी और का स्मरण चाहिये

रहूँ तेरे चरण में सदा #माँ मुझे तेरी शरण चाहिये

 

13 देख यारा तकदीर भी अज़ब खेल खिलाती है

बचपन में जिसने पोंछे वही चुपके आँसू बहाती है #माँ

 

14 माँ थककर बैठी आस में आराम मिलेंगे कदमो को

और बेटे ने आवाज़ लगा दी पानी देना पीने को

 

15 दावत नही देना पड़ता, आप मुस्काते रहिये,

खुशियां खुद ब खुद आपके लब चुम लेगी ..

 

16 अपनी याद से हिचकियां नही दिलाती है

अपने बच्चों को कोई #माँ नही सताती है

 

17 ख़ामोश उसका चेहरा तकलीफ़ बता देता है

घर में बेटे चार है देखते है दवा कौन ला देता है

 

18 बेवज़ह ही पूछ लिया करो कि तेरा हाल कैसा है

#माँ की चुप्पी का मतलब ये नही की तकलीफ नही उसे

 

19 सरहद पार भी रहो तो याद रहे मेरी एक बात

#माँ की गोद ज़न्नत है कहि नही ऐसी क़ायनात

 

20 हर #माँ की तकलीफ बस इतनी है,

तेरे लबों की मुस्कुराहट कोई और कैसे हो गई

 

21 चार दिन के इश्क़ ने तुझे कितना बदल दिया,

तालीम ऐ इश्क़ सीखा जिस #माँ से उसे भुला दिया

 

22 चाहे कितनो प्यारा हो, इंसान वक़्त बुरा हो तो, उसके लब से निकली हर बात बुरी होती है ..

 

23 अपना पल पल तुझमे खोयी है

सोच, वो #माँ क्यू तन्हा रोयी है

 

24 भूल न जाये इसलिये पल्लू में गाँठ बाँध लेती है

मेरी भूख चार रोटी की #माँ आठ बाँध देती है

 

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