#Shayari by Karan Bahadur Sahar

मुद्दतों बाद भी जिंदा हैं हमारी ख्वाहिशें,

आज भी आज़ाद परिंदा हैं हमारी ख्वाहिशें।।

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कागज़ पे बना था जो चेहरा

अब आईने में उतर आया

आईने में जो चेहरा है

वो अब दिल मे उभर आया।।

 

कुछ रोज़ हुए हैं हमको तो,

अभी इश्क जताना बाकी है,

सारी दुनिया को खबर हो गई है

बस उनको बताना बाकी है।।

 

जब भी वो सामने आ जाएं

कुछ बोल नही पड़ता बातों से,

जब इश्क किसी को हो जाए,

तब दिल नहीं भरता रातों से।।

 

हमको इस बात का रोना है,

क्या पाएंगे ओर क्या नहीं,

सब कुछ ही गलत है मोहब्बत में

लेकिन सब कुछ लगता है सही।।

 

ऐ काश के हम भी गुज़र जाएँ

इस इश्क में हद भी कर जाएँ,

गर वो हम को ना मिल पाए,

हम खुद से पहले मर जाएं।।

 

करन “सहर”

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