#Shayari by Karan Sahar

मुझे क़रीब से वो पढ़ या फिर सुन रहा होगा,

मेरी ग़ज़लों से अपने किस्सों को चुन रहा होगा ।।

 

हमारे इश्क़ में क्यों जम गई हैं ख़ाक सी रातें,

कि मौसम सर्द है तो वो भी पहलू बुन रहा होगा ।।

 

#करन_सहर

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