#Shayari by Parul Singh

“आज भी बारिश है,
आज भी बादल काले है,
बस महसूस करने और देखने का नज़रिया बदल गया।”
पारुल सिंह


“मुझे हर बार तुमसे दूर जाने की वजह नहीं मिलती,
और पास आने का बहाना ढूंढ़ना नहीं पड़ता।”
पारुल सिंह


“धड़कन, ख़ुशबू, साँसे
सब ही तो यही है तुम्हारी,
फिर क्यूँ बार बार तेरे आने की राह पर आँखे टिकाए रहते है।”
पारुल सिंह


“आज शायद बरसेंगे नहीं
रूठें हैं ना ये बदल
मैं हर बार इन्हें तेरे आने की झूठी ख़बर जो देती हु।”
पारुल सिंह

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