#Shayari by Parul Singh

“आज शायद बरसेंगे नहीं
रूठें हैं ना ये बदल
मैं हर बार इन्हें तेरे आने की झूठी ख़बर जो देती हु।”
पारुल सिंह

“उन्होंने कहा कि हम लिखते अच्छा है,
हमने कहा
अजी ये तो बस एहसासों का दर्पण है।”
पारुल सिंह

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