#Shayari by Parul Singh

“मेरी यादों की आँखों में तुम्हारा ख़्वाब पलता है,
ज़रा सी रोशनी कर दो तो हक़ीक़त में बदल  जाए।”
पारुल सिंह

“कितनो को है आज कल फ़िट्नेस की भूख लगी,
क्या होगा उसका जिसके पास एक वक़्त की रोटी भी नहीं।”
Parul Singh

“अरसे बाद एक बूँद माथे पर गिरी थी बारिश की,
रुकी तक नहीं एक लम्हा भी,
उसको जल्दी थी मंज़िल तक जाने की।”
Parul Singh

“उसकी ख़ामोशी को हर बार सुना था मैंने,
पर मुझे भी तो हक़ था ख़ामोश रहने का।”
पारुल सिंह

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