#Shayari by Raghvendra Singh

शायरी

वो सुरमयी अंदाज अब अपने बस में नहीं।

तेरे जैसा नूर कहीं है ही नहीं।

क्या लिखूं क्या नाम दूँ तेरी खूबसूरती को,,

मेरी कलम की मसि में वो अल्फ़ाज ही नही

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वक्त आजाद हम गुलाम हो गए।

मेरे सारे ख़्वाब अब किसके नाम हो गए।

कुछ अपनापन समझ के मिले थे तुमसे,,

दिल मे उतरने से पहले ही हम बदनाम हो गए।

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