#Shayari by Rifat Shaheen

उसने रात के अँधेरे में मेरी नाज़ुक कलाई पर लिखा था चुपके से

मुझे प्यार है तुमसे “

जाने कैसी स्याही थी की वो लफ्ज़ मिटे भी नही और दिखे भी नही

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कहीं पे कुछ तो टूटा है ये मायूसी बताती है

बहुत है शोर दिल मे लब की खामोशी बताती है

बहुत सी किरचियाँ तुमने समेटी हैं इन हाथों से

तुम्हारी उँगलियाँ ज़ख्मी है हाँ ये भी बताती है

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हम भी सीने में धड़कता हुआ दिल रखते हैं

सिन्फे नाज़ुक हैं मगर माल ए ग़नीमत तो नही

 

हम भी सीने में धड़कता हुआ दिल रखते हैं

सिन्फे नाज़ुक हैं मगर माल ए ग़नीमत तो नही

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