#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

शायरी ~

तुम्हारे काले काले केशुओं में
जाने क्यों उलझ रहे हैं
मौसम हैं रिमझिम फुआरों का,
और हम सुलग रहे हैं ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल “

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