#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

~ शायरी ~

लाखों में एक अजनबी हम भी सही ,
पर देखकर क्यों मुस्कुराते हो ,
गैरों पर करम अपनों पर सितम ,
फिर काहे नजरों से नजर चुराते हो ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल “

Leave a Reply

Your email address will not be published.