#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

~ शायरी ~

 

दिल में उम्मीदों का ख्वाब पलता रहा,

बिन कहे उससे सब कुछ चलता रहा ,

वो हँसकर एक नजर देख क्या गये,

में ताउम्रभर मोमबत्ती सा जलता रहा ।

***

कोई भी पढ ले जो में वो किताब नहीं हूँ ,

उँगलियों पर जुड जाये में वो हिसाब नहीं हूँ ,

मेरे शब्दों को तुम समझो या ना समझो पर,

किसी के दिल को जलाये में वो तेजाब नहीं हूँ ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल”

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