#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

बहुत समहल कर चले रास्ते भर ,

किनारे पर आकर के फिसल गये ,

दिन में सूरज की तपन से तो बच गये ,

पर रात में शबनम की बूँदों से जल गये ।

 

~ सौरभ दुबे  ” साहिल”

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