#Shayari By Vinod Bairagi

दर्द सिने मे था,

पर मे मे सोचता रहा,

धड़कन  रुकी हुइ थी

मे  रातभर रोता रहा..

छू रहे थे सब,

मेरे इस दिल को,

मैं इस दिल का

दार्द को छुपाता रहा

नाजुक होता तो,

कब का टूट गया होता,

वो था दिवाना ,

जो सबके आगे झुकता रहा..

**

ये  दिल जब भी तु जववान होता है।

ना जाने कितनो से तुझे  प्यार  होता है

 

तु जब भी  किसी दिल से मिलता है तो

तुझपे ही कितना गुमान होता है

 

ज़िन्दगी तब हसीन लगती है

जब कोई दिल तुझपे मेहरबान  होता है

 

विनोद बैरागी वैष्णव  ,  शाजापुर म.प्र.  –  7697462007

 

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