#Shayari by Vinod Rathor

हे सनम तेरे वादा मोदी की तरह झूठा लगता हे।

शहजादा का और मेरा किस्मत फुठा लगता हे।

हम तो दोनों ही चाहते हे की हासिल करे तुझे

पर क्या करे हमसे हमारा नसीब रूठा लगता हे।

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मेरे  दोस्त एक बार तो दीदार दे देे।

जूठा ही सही पर थोडा सा तो प्यार दे दे।

कब से बेठे हे हम तेरे इन्तेजार में,

अब तो हमे थोडा सा एतबार दे दे।

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: बीच रहो में यूँ चलते चलते कभी हाथ मत छोड़ देना ।

किसी भी गलत फहमी तुम मेरा साथ मत छोड़ देना ।

में सम्भल नही पाऊंगा कभी भी तुम्हारे बिना कसम से,

करते करते मिठ्ठी बाते कभी करना बात मत छोड़ देना।

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हम सिमटते गए खुदमे वो हमे भुलाते गये।

हम हसाते गये उन्हें वो हमे बस रुलाते गये।

क्या इश्क में इतनी भी बेरुखी मुनासिफ हे,

हम इम्तिहान देते रहे वो हमे आजमाते गए।

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रंगो  का  मौसम  हे  होली  का  त्यौहार ।

हो आपके जीवन में खुशियो की बौछार।

सातो रंग का मेल हो आपके जीवन में

बस यही प्राथना हे मेरी ओ मेरे सरकार।

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हमे इश्क में रूठना और मनाना भी नही आता ।

इश्क  हे!आपसे पर हमे जताना भी नही आता।

बेसक आदत होगी आपको दिलो से खेलने का ,

पर हमे तो किसी का दिल दुखाना भी नही आता।

By-विनोद राठौर

 

 

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