#Tewari by Ramesh Raj

जनक छन्द में तेवरी।।
जीवन कटी पतंग रे
हुई व्यवस्था भंग रे, अब तो मुट्ठी तान तू।
दुःख ही तेरे संग रे
स्याह हुआ हर रंग रे, अब तो मुट्ठी तान तू।
कुचलें तुझे दबंग रे
बन मत और अपंग रे, अब तो मुट्ठी तान तू।
गायब खुशी-तरंग रे
सब कुछ है बेढंग रे, अब तो मुट्ठी तान तू।
लड़नी तुझको जंग रे
बजा क्रान्ति की चंग रे, अब तो मुट्ठी तान तू।
+रमेशराज

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