tevari by ramesh raj

+“ऊधौ कहियो जाय”(तेवरी शतक) से तेवरी —
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टीस बनी ‘हरिगीतिका’, हुए ‘सवैया’ घाव
भावुक मन पढ़ने लगा ऊधौ कैसे छन्द। घने दुःख की कविताएँ।।
त्रासदि ‘मालाफूल’-सी, ‘चौपाई’ पथराव
अब जन-जन पढ़ने लगा ऊधौ कैसे छन्द। घने दुःख की कविताएँ।।
आँसू ‘शक्ति’-‘विजात’-से, ‘दोहे’ बने तनाव
नयन-नयन पढ़ने लगा ऊधौ कैसे छन्द। घने दुःख की कविताएँ।।
पीड़ा लगे ‘सुमेरु’-सी, ‘सगुण’ भूख-अलगाव
ये यौवन पढ़ने लगा ऊधौ कैसे छन्द। घने दुःख की कविताएँ।।

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