#Tevri by ramesh raj

जब सबका ये देश है अपना हिन्दुस्तान
फिर  माँगें कुछ लोग क्यूँ ऊधौ  निजी विधान। जान आफत है सबकी।।

तुम कहते हर धर्म  में है सुनेह की बात
तब किसने सद्भाव के लिये यहाँ पर प्रान। जान आफत है सबकी।।

हिन्दू मुस्लिम सिख हुए, छुए न सच के सार
ऊधौ  क्यों मिलता नहीं, कहीं आज इन्सान? जान आफत है सबकी।।

अब उससे इन्सानियत नत आहत क्यों दूर
ऊधौ  जिस-जिस ने पढ़े गीता-वेद-कुरान। जान आफत है सबकी।।

आज धर्म  के नाम पर, डर-खंजर-पथराव
इन्सां के खूँ में सने बने चीख मृदुगान। जान आफत है सबकी।।

Leave a Reply

Your email address will not be published.