#Tewari by Ramesh Raj

वर्णिक छन्द में तेवरी।।

सत्ता की कुचालन कूँ राम-राम दूर से

मकड़ी के जालन कूँ राम-राम दूर से, है प्रणाम दूर से |

धनिये में लीद मिलै, कंकरीट दाल में

मोटे-मोटे लालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

सरकारी आँकड़ों के बादलों में जल है

सूखे-सूखे तालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

चीकने घड़ों की कौम, नेतन के वंश को

गैंडे जैसी खालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

खोपड़ी को लाल-लाल हर हाल जो करें

ऐसी फुटबालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

नेताजी के बँगले में फसले-बहार है

फूली-फूली डालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

जाली नोट, खींचे वोट, चोट दे वतन को

ऐसी टकसालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

फिल्मी अदा के साथ प्रश्न सब पूछते

यक्ष के सवालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

आपके ये ढोल-बोल ! आपको ही शुभ हों

तालहीन तालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

तोल-तोल तू बोल हमसे रमेशराज

बड़बोले गालन कूँ राम-राम दूर से , है प्रणाम दूर से |

+ रमेशराज +

 

 

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