#Tewari by Ramesh Raj

रमेशराज की तेवरी ||

कोई घर-भीतर काँप रहा

तो कोई बाहर काँप रहा |

सब ओर सियासी असुर देख

हर इन्सां थर-थर काँप रहा ||

 

होकर चश्मे-तर काँप रहा

अब पूरा मंजर काँप रहा |

हिंसा का ऐसा दौर नया

खुशियों का हर घर काँप रहा ||

 

अब कविता का स्वर काँप रहा

सच का हर अक्षर काँप रहा |

दुर्योधन का दुस्साहस लखि

कवि बना युधिष्ठिर काँप रहा ||

+रमेशराज

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