#Tewari by Ramesh Raj

|| रमेशराज की एक तेवरी ||

हम देख रहे

अट्टहास के भीतर भी ग़म देख रहे।

यम देख रहे

खुशियाँ चूड़ी तोड़ें मातम देख रहे।

नम देख रहे

नयन-नयन को कैसा हरदम देख रहे।

बम देख रहे

रक्तपात-हिंसा का आलम देख रहे।

खम देख रहे

डूब रही धड़कन के उत्क्रम देख रहे।

+रमेशराज

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