#Tewari by Ramesh Raj

तेवरी ….
हाय-हाय डकराय बोलियो बाबुल से
बँधी बधिक घर गाय बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

ऐसी बैरन सास, टाँग मेरी तोड़ी
मो पै चलौ न जाय बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

लै मिट्टी कौ तेल छिड़क देवर बोल्यौ
‘तो कूँ दऊँ जलाय’, बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

जो गहने मइया ने बनवाये मोकूँ
वे भी लिये छुपाय बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

‘स्कूटर ला साथ नहीं तो रह पीहर’
कहते सब गुर्राय, बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

कोल्हू कौ ज्यों बैल, गधा ज्यों धोबी कौ
मोकूँ लेत थकाय, बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

ननद संग अपशब्द बोलती जेठानी
ससुर मंद मुसकाय बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

बनी जिन्दगी आज तुम्हारी बिटिया की
चीखों का पर्याय, बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

लाल-लाल करि आँख जेठ सँग वे भी अब
बात करें चिल्लाय, बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।

मैं पिंजरे को तोड़ भागि जाऊँ कित कूँ
सूझे नहीं उपाय, बोलियो बाबुल से। बात कहियो खुल के।।
+रमेशराज

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