#Tewari by Ramesh Raj

तेवरी …

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महँगाई घुसि आयी तेरे चौका-चूल्हा-आँगन में

सुन इसका उपचार नहीं है काशी या वृन्दावन में। आग लगै जा सिस्टम में।।

 

पहले पजरी दाल, स्वाह अब हल्दी-चीनी-मिसरी है

क्या सब्जी क्या तेल, किल्लतें बढ़ीं दूध-घी-माखन में। आग लगै जा सिस्टम में।।

 

तू बिल्ली-सा बैठि मानता न्याय तेरे हक़ में होगा

रोटी को लेकर इस युग में न्याय कहाँ बन्दरपन में। आग लगै जा सिस्टम में।।

 

ये खरगोश राह में प्यारे अबकी बार न सोयेगा

अगर जीतनी दौड़ रे कछुए ! फुर्ती ला अपने तन में। आग लगै जा सिस्टम में।।

 

जल की एक बूँद भी तुझको मिले नहीं प्यासे कउए

वे कंकड़ ही पीयें जल को तू डाले जो बर्तन में। आग लगै जा सिस्टम में।।

 

जाने मत दे व्यर्थ इन्हें तू फैंक पाप की लंका पर

धढके जो अंगार क्रान्ति के आज तेरे अन्तर्मन में। आग लगै जा सिस्टम में।।

+रमेशराज

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