#Tewari by Ramesh Raj

तेवरी—

कहीं दिखायी दे नहीं शिव जैसा व्यक्तित्व

डाले हुए गले में मिलते बस हरहार बहुत से हैं।

अमरबेल-सी बढ़ रही भाटों की फहरिश्त

ये क्या कम है इस दुनिया में पानीदार बहुत से हैं।

छिनरे, लुच्चे, सिरफिरे, नंगे, आदमखोर

आज सियासत को ऐसे ही अंगीकार बहुत से हैं।

शोषण, हिंसा, शोक, भय, रेप, भोग, व्यभिचार

अब जन-जन की करुण-कथा के उपसंहार बहुत से हैं।

आये हैं शैतान कुछ कर में लिये गुलेल

इस जंगल में पेड़ बसें मीठे फलदार बहुत से हैं।

 

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