#Tewari by Ramesh Raj

|| यमकदार तेवरी ||

आज धोखे खा रही क्यों जि़न्दगी

अब मुझे हर बार ही, हरवा रही क्यों जि़न्दगी?

हम सफर में साथ हैं ऐ हमसफर

यह दिलासा छल-भरी फरमा रही क्यों जि़न्दगी?

है जहाँ तक ये, जहाँ में घूमती

जो अलौकिक है उधर को जा रही क्यों जि़न्दगी?

तू अगर जलवायु तो, जल-वायु दे

आग का किस्सा लिये तू आ रही क्यों जि़न्दगी?

स्वच्छता जा ला उधर, जाला जिधर

सिर्फ निन्दा-गीत ही तू गा रही क्यों जि़न्दगी।

+ रमेशराज +

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