#Tewari by Ramesh Raj

रमेशराज की तेवरी ||

प्यार का गुन जन में गुंजन दे नहीं

आज सावन हरित-सा वन दे नहीं तो क्या करें?

जिन्दगी शतरंज पर शत रंज भी

दिव्य साधन दिव्य-सा धन दे नहीं तो क्या करें?

सुखद सागर सुखद-सा गर अब नहीं

जो सु-मन, हमको सुमन घन दे नहीं तो क्या करें?

पीर का गज- भर लिखें, कागज नहीं

आज कलम न, दर्द कल मन दे नहीं तो क्या करें?

प्रेम-बंधन आज बन धन ही गया

भाव कुन्द न, किन्तु कुन्दन दे नहीं तो क्या करें?

[ रमेशराज ]

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