#Tewari by Ramesh Raj

लोक-शैली ‘रसिया’ पर आधारित तेवरी ||
त्यागी वे चौपालें, मन की व्यथा जहाँ बतिया लें
अब तो चिलम-‘बार के हुक्का’ हमको प्यारे हैं।
नूर टपकता हरदम, उन बातों से दूर हुए हम
लुच्चे लपका लम्पट फुक्का हमको प्यारे हैं।
हर विनम्रता तोड़ी, हमने रीति अहिंसक छोड़ी
गोली चाकू घूँसा मुक्का हमको प्यारे हैं।
कोकक्रिया के अंधे, हमने काम किये अति गन्दे
गली-गली के छिनरे-लुक्का हमको प्यारे हैं।
धर्म-जाति के नारे, यारो अब आदर्श हमारे
सियासी धन-दौलत के भुक्का हमको प्यारे हैं ।
+रमेशराज

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