#Tewari by Ramesh Raj

| लोक- शैली ‘रसिया’ पर आधारित तेवरी ||

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पूँजीवादी चैंटे, कुछ दिन खुश हो लें करकैंटे

जनवादी चिन्तन की खिल्ली चार दिनों की है।

 

राजनीति के हउआ, कुछ दिन मौज उड़ालें कउआ

सत्ता-मद में डूबी दिल्ली चार दिनों की है।

 

ओढ़े टाट-बुरादा, फिर भी ऐसे जिये न ज्यादा

गलती हुई बरफ की सिल्ली चार दिनों की है।

 

अब घूमेगा डंडा, इसकी पड़े पीठ पर कंडा

दूध-मलाई चरती बिल्ली चार दिनों की है।

 

कांपेंगे मुस्तंडे, अब अपने हाथों में डंडे

जन की चाँद नापती गिल्ली चार दिनों की है।

 

शोषण करती तोंदें , कल संभव है शोषित रौंदें

फूलते गुब्बारे की झिल्ली चार दिनों की है।

+रमेशराज

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