#Tewari by Ramesh Raj

शृंगार छंद में तेवरी ||
तिमिर ने घेरा सुखद प्रभात, न छापेगा कोई अख़बार
भोर के बदले आयी रात, न छापेगा कोई अख़बार |
दिखायी देता अजब जूनून, उतारी सब भेड़ों से ऊन
लगाये बैठे चीते घात, न छापेगा कोई अख़बार |
हुआ सारी ख़ुशियों का अंत, दिखायी देता अजब वसंत
सूखे हरे-हरे सब पात, न छापेगा कोई अख़बार |
पुजें अब केवल तस्कर-चोर, मंच पर छाये आदमखोर
बढ़ी हर नंगे की औकात, न छापेगा कोई अख़बार |
कि जिसकी खातिर बना विधान, उसी का कदम-कदम अपमान
उसी जनता को गहरी मात, न छापेगा कोई अख़बार |
+रमेशराज

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