#Tewari by Ramesh Raj

।। दोहा छंद में वर्णों के अनुसार एक नया प्रयोग कर रची गयी एक तेवरी।।
भानस-भानस राजभा नसल नसल ताराज
माखन-सा मन खो गया, पल-पल गिरती गाज।
ढोलक ढोल न बाँसुरी, सुर गुम, बिसरी ताल
सावन-सा मन खो गया, पल-पल गिरती गाज।
कोंपल-कोंपल-फूल से चमक-महँक है मौन
चन्दन-सा मन खो गया, पल-पल गिरती गाज।
यौवन-ये तन आह में, अति भटकन में चाह
आँगन-सा मन खो गया, पल-पल गिरती गाज।
काजल, पायल या हिना अब कंगन ऊधौ न
दर्पन-सा मन खो गया, पल-पल गिरती गाज।
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