#Tewari By Ramesh Raj

यमकदार तेवरी —
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मंजर बदलें आज; फैले डर-आतंक के [ सोरठा ]
चिडि़याएँ आवाज दें, हमसे लड़ आ, बाज। [ दोहा ]

हत् दिनकर की लाज, रखें दीप-सम आज हम
रहा वचन अब बच न तू पायेगा तमराज।

जो शोषण-सम्राट, अब न रहें सरताज वो
बाँधेंगे हम लोग मिल जनता के सर ताज।

होता शहद समान पाजी को पा जी कहाँ
पाजी की बातें सुने कब तक और समाज।

सहें दर्द ही दर्द सब अन्तर अन तर रहें
कौन माँगता है यहाँ ऐसी उम्र दराज।
+ रमेशराज

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