#Tewari by Ramesh Raj

मुक्तक विन्यास में एक  तेवरी ||

कोड़े तैयार उसी के हैं

बिजली के तार उसी के हैं |

तू बचा सके तो बचा बदन

फैंके अंगार उसी के हैं |

जनता पर वार उसी के हैं

चैनल-अख़बार उसी के हैं |

इसलिए उधर ही रंगत है

सारे त्योहार उसी के हैं |

सब अत्याचार उसी के हैं

अब थानेदार उसी के हैं |

हम सिसक रहे जिस बोझ तले

सारे अधिभार उसी के हैं |

+रमेशराज

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