#Tewari by Ramesh Raj

रमेशराज की तेवरी….

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जाने क्या हो गया समय के मुँदे हुए हैं नैन

मानव से मानव परिचय की आँख नहीं खुलती।

 

अंधों-सम्मुख उषा-भरी सच्चाई करे बयान

इस प्रकरण पर क्यों ‘संजय’ की आँख नहीं खुलती।

 

कर्कश स्वर के महानाद में बीती उम्र तमाम

मुद्दत से अब मीठी लय की आँख नहीं खुलती।

 

अहंकार में-उन्मादों में संवादित इन्सान

सद्भावों के सद् आशय की आँख नहीं खुलती।

 

खिलने से पहले मुरझाया फूलों-भरा विधान

कलियों के तन-मन में वय की आँख नहीं खुलती।

+रमेशराज

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